मेरी दुनिया...

Thursday, June 21, 2007

तुमसे कहना हैं...






" उडती उमंगो कि कहानी-


सुनानी होगी ज़ुबानी,


गूंजती तरंगो कि बात-


बांटनी होगी सौगात,


मन कि पिटारी मे क्या है-बतलाओ तो?


नही समझ पाऊं तो,बैठ कर समझाओ तो!


वर्ना पछताओगे


चुप नही रह पाओगे


सच कहती हूँ यार-


मुझे, ढूँढ़ते रह जाओगे!


प्यार "

2 comments:

उन्मुक्त said...

वाह क्या बात है। देवनागरी में ही लिखिये।

mehek said...

wah sundar,dil ki baat keh hi deni chahiye,hai na.