मेरी दुनिया...

Monday, November 5, 2007

..."प्यार एक खुशबू हैं"


मेरी आंखों में एक नदी बहती हैं...
मेरी सासों में कोई साज़ बजता हैं...
मेरा मन कस्तूरी का मृग...
मेरी सोच ,
" रंगियो चोल रंग चीर"
इस से अधिक मेरा कोई परिचय नही...
अगर तुम जानते हो यह बात तो निश्चित ही मुझे पहचान लोगे...
कहीं कोई व्यवधान नही....
नदी के पानी में उतर कर हंस बन जाना...
साँसों के बजते साज़ पर कोई मधुर गीत गाना...
कस्तूरी के मृग को आहत मत होने देना....
मेरी सोच के रंग में रंग कर...
मेरी पहचान का हिस्सा बन कर...
अपनी पहचान मेरे पास रख देना...
ज़िंदगी के रास्ते भले ही लंबे हो...
कौन कहाँ पे मुड़ जाये यह कोई नही जानता...
लोग खाली हाथ आते हैं , खाली हाथ जाते हैं...
सब कुछ यही पर छोड़ कर जाना हैं...
पर मैं एक चीज़ ले जाने को सोचती हूँ...
शायद तुमने बात समझ ली...
पहचान पास ही रहने दो...
"प्यार एक खुशबू हैं"
इस एहसास को साथ लेकर ही
यहाँ से जाना चाहती हूँ....

2 comments:

ek insan said...

"प्यार एक खुशबू हैं"
इस एहसास को साथ लेकर ही
यहाँ से जाना चाहती हूँ....


bahut khoob likha hai

Anil

रंजू said...

"प्यार एक खुशबू हैं"
इस एहसास को साथ लेकर ही
यहाँ से जाना चाहती हूँ....


बहुत सुंदर बात लिख दी आपने सही लिखा