मेरी दुनिया...

Wednesday, August 27, 2008

मेरा मन - एक परिचय !


मेरा मन, एक पुस्तक है ,
जिसके प्रत्येक पृष्ठ पर -
तुम्हीं रेखांकित हो
अक्षर-अक्षर में -
तुम्हारी ही छवि बोलती है !
तुम्ही छंद हो, तुम्ही लय हो
यह पुस्तक, तुम्हारा समन्वय है !
शरीर तो एक आवरण है
जिसे प्यार और करुणा के रंग से
सँवारने का अथक प्रयास करती हूँ ......
ताकि कभी तुम स्वतः
पुस्तक खोलने पर बाध्य हो जाओ !
फिर.............
उम्मीद है, तुम्हारी आंखों की नमी
स्वाति के बूंद-सी
- मेरे माथे पर टपकेगी !

11 comments:

masoomshayer said...

dil karata hai tumharee kavitayen katha kee kee tarah har apwan din padhoon upwas ka asar hai in men

renu agarwal said...

उम्मीद है, तुम्हारी आंखों की नमी
स्वाति के बूंद-सी
- मेरे माथे पर टपकेगी !
ati sunder !
अद्भुत है ये प्रेम !! वो रोम रोम मे अंकित है फीर भी एक बूँद नीर को प्यासा है मन
एक शेर है .....
तमाम उमर उसका इंतज़ार किया
जो कभी खुद से जुदा न हुआ ....

GOPAL K.. MAI SHAYAR TO NAHI... said...

प्यार की सुन्दर अनुभूति है इस कविता में..!!

Mrs. Asha Joglekar said...

Ati Sunder.

sakhi1909 said...

SASAKT RACHANA
BAHUT AHSAS KISI KE INTZAR ME HAI JAISE.
SAKHI

राज भाटिय़ा said...

आप की कविता सीधी दिल मे उतरती हे, धन्यवाद

संत शर्मा said...

शरीर तो एक आवरण है
जिसे प्यार और करुणा के रंग से
सँवारने का अथक प्रयास करती हूँ ......
ताकि कभी तुम स्वतः
पुस्तक खोलने पर बाध्य हो जाओ !
फिर.............
उम्मीद है, तुम्हारी आंखों की नमी
स्वाति के बूंद-सी
- मेरे माथे पर टपकेगी !

Bahut hi khubsurat avivyakti.

*KHUSHI* said...

bahut hi sundar likha hai apane... likhti rhaiyega...

btw.. chk out my blog.. we share common name... :)

EHSAAS said...

amma....ye kavitaaen to mere liye aapke wo pad-chinh hain jin par chalne ki ye balak koshish karta hai.....anmol kavita......har baar ki tarah!

...Ehsaas!

sangeeta said...

जिसे प्यार और करुणा के रंग से
सँवारने का अथक प्रयास करती हूँ ......
ताकि कभी तुम स्वतः
पुस्तक खोलने पर बाध्य हो जाओ !
bahuty sundar . achchhi abhivyakti hai.
saadar

Brajesh said...

"अक्षर-अक्षर में -तुम्हारी ही छवि बोलती है" शब्दों का चयन मन को छू गया...बहुत ही अच्छा लिखा है आपने।